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Friday, 5 June 2020
Thursday, 4 June 2020
Tuesday, 2 June 2015
Sunday, 17 May 2015
रचना के आधार पर वाक्य का परिवर्तन (RACHANA KE ADHAR PAR VAKYA PARIVARTAN) CBSE CLASS X HINDI GRAMMAR SENTENCE TRANSFORMATION IN HINDI
रचना के आधार पर सरल वाक्य का परिवर्तन
सरल वाक्य से संयुक्त वाक्य ==>
१ - सरल वाक्य ==> राधा नाचती - गाती है।
संयुक्त वाक्य ==> राधा नाचती है और गाती है।
२ - सरल वाक्य ==> मोहन हँसकर बोला।
संयुक्त वाक्य ==> मोहन हँसा और बोला।
३ -सरल वाक्य ==> तुम पढ़कर सो जाना।
संयुक्त वाक्य ==> तुम पढ़ना और सो जाना।
४ -सरल वाक्य ==> अंकित की कलम छूटकर गिर गई।
संयुक्त वाक्य ==> अंकित की कलम छूटी और गिर गई।
५ -सरल वाक्य ==> बादल घिरते ही मोर नाचने लगा।
संयुक्त वाक्य ==> बादल घिरे और मोर नाचने लगा।
६ -सरल वाक्य ==> प्रथम आते ही खेलने लगे।
संयुक्त वाक्य ==> प्रथम आया तथा खेलने लगा।
७ -सरल वाक्य ==> सूरज के निकलते ही फूल खिल उठे।
संयुक्त वाक्य ==> सूरज निकला और फूल खिल उठे।
८ -सरल वाक्य ==> अभि तथा दीपक खेल - कूद रहे हैं ।
संयुक्त वाक्य ==> अभि तथा दीपक खेल रहे हैं एवं कूद रहे हैं।
९ -सरल वाक्य ==> सूरज पढ़-लिखकर अधिकारी बना।
संयुक्त वाक्य ==> सूरज पढ़ा-लिखा और अधिकारी बना।
१०-सरल वाक्य ==> अभिषेक थैला लेकर बाज़ार चला गया ।
संयुक्त वाक्य ==> अभिषेक थैला लिया और बाज़ार चला गया।
सरल वाक्य से मिश्र वाक्य ==>
१ -सरल वाक्य ==> राधा नाचती - गाती है।
मिश्र वाक्य ==> जो नाचती - गाती है , वह राधा है।
२ -सरल वाक्य ==> मोहन हँसकर बोल।
मिश्र वाक्य ==> वह मोहन है जो हँसकर बोल।
३ -सरल वाक्य ==> तुम पढ़कर सो जाना।
मिश्र वाक्य ==> जब तुम पढ़ लेना तब सो जाना।
४ -सरल वाक्य ==> अंकित की कलम छूटकर गिर गई।
मिश्र वाक्य ==> जो कलम अंकित से छूटी , वह गिर गई।
५ -सरल वाक्य ==> बादल घिरते ही मोर नाचने लगा।
मिश्र वाक्य ==> जैसे ही बादल घिरे , मोर नाचने लगा।
६ -सरल वाक्य ==> प्रथम आते ही खेलने लगे।
मिश्र वाक्य ==> प्रथम जैसे ही आया वह , खेलने लगा।
७ -सरल वाक्य ==> सूरज के निकलते ही फूल खिल उठे।
मिश्र वाक्य ==> सूरज निकला और फूल खिल उठे।
८ -सरल वाक्य ==> अभि तथा दीपक खेल - कूद रहे हैं।
मिश्र वाक्य ==> जो खेल एवं कूद रहे हैं,वे अभि तथा दीपक हैं।
९ -सरल वाक्य ==> सूरज पढ़-लिखकर अधिकारी बना।
मिश्र वाक्य ==> जैसे ही सूरज पढ़-लिखा,वह अधिकारी बन गया।
१०-सरल वाक्य ==> अभिषेक थैला लेकर चला गया।
मिश्र वाक्य ==> अभिषेक तब चला गया जब उसने थैला लिया।
रचना के आधार पर संयुक्त वाक्य का परिवर्तन
संयुक्त वाक्य से सरल वाक्य ==>
१ - संयुक्त ==> सभी लिख चुके हैं लेकिन सृजिता अभी तक लिख रही है।
सरल ==> सभी के लिख चुकने पर भी सृजिता लिख रही है।
२ - संयुक्त ==> निधि रात भर पढ़ती है ताकि परीक्षा देने की तैयारी कर सके।
सरल ==> निधि रातभर पढ़कर परीक्षा देने की तैयारी करती है।
३ - संयुक्त ==> अभिलाषा ने रोना शुरू किया और बेहोश हो गई।
सरल ==> अभिलाषा रोते हुए बेहोश हो गई।
४ - संयुक्त ==> एलिन फ़ेसबुक करती है या ह्वाट्सएप करती है।
सरल ==> एलिन फ़ेसबुक या ह्वाट्सएप करती है।
५ - संयुक्त ==> श्रेयसी बीमार थी अत: स्कूल नहीं आई।
सरल ==> श्रेयसी बीमार होने के कारण स्कूल नहीं आई।
६ - संयुक्त ==> सौमिता खाना खाई और चली गई।
सरल ==> सौमिता खाना खाकर चली गई।
७ - संयुक्त ==> आयुष ने केक काटा और सबको बाँट दिया ।
सरल ==> आयुष ने केक काट कर सबको बाँट दिया ।
८ - संयुक्त ==> सीमा को खेलना भी अच्छा लगता है और सोना भी।
सरल ==> सीमा को खेलना और सोना अच्छा लगता है।
९ - संयुक्त ==> तुम्हारे बारे में सभी बच्चे जानते हैं और बड़े भी।
सरल ==> तुम्हारे बारे में बच्चे और बड़े सभी जानते हैं।
१० - संयुक्त ==> उसके पास घड़ी तो थी किन्तु ठीक नहीं थी।
सरल ==> उसके पास ठीक घड़ी नहीं थी।
संयुक्त वाक्य से मिश्र वाक्य ==>
१- संयुक्त वाक्य ==> सभी लिख चुके हैं लेकिन सृजिता अभी तक लिख रही है।
मिश्र वाक्य ==> सृजिता लिख रही है जबकि सभी लिख चुके हैं।
२-संयुक्त वाक्य ==>निधि रात भर पढ़ती है ताकि परीक्षा देने की तैयारी कर सके।
मिश्र वाक्य ==> निधि इसलिए रातभर पढ़ती है क्योंकि वह परीक्षा देने की तैयारी करती है।
३- संयुक्त वाक्य ==>अभिलाषा ने रोना शुरू किया और बेहोश हो गई।
मिश्र वाक्य ==> जैसे ही अभिलाषा ने रोना शुरू किया, वह बेहोश हो गई।
४- संयुक्त वाक्य ==> एलिन फ़ेसबुक करती है या ह्वाट्सएप करती है ।
मिश्र वाक्य ==> जो फ़ेसबुक या ह्वाट्सएप करती है, वह एलिन है।
५- संयुक्त वाक्य ==> श्रेयसी बीमार थी , अत: स्कूल नहीं आई।
मिश्र वाक्य ==> श्रेयसी स्कूल नहीं आई क्योंकि वह बीमार थी।
६- संयुक्त वाक्य ==> सौमिता खाना खाई और चली गई।
मिश्र वाक्य ==> ज्योंही सौमिता ने खाना खाया, वह चली गई।
७- संयुक्त वाक्य ==> आयुष ने केक काटा और सबको बाँट दिया ।
मिश्र वाक्य ==> आयुष ने सबको केक तब बाँटा जब काट लिया।
८- संयुक्त वाक्य ==> सीमा को खेलना भी अच्छा लगता है और सोना भी।
मिश्र वाक्य ==> वह सीमा है जिसे खेलना और सोना अच्छा लगता है।
९- संयुक्त वाक्य ==> तुम्हारे बारे में सभी बच्चे जानते हैं और बड़े भी।
मिश्र वाक्य==> जिसके बारे में सभी बच्चे और बड़े जानते हैं,वह तुम हो।
१०- संयुक्त वाक्य ==> उसके पास घड़ी तो थी , किन्तु ठीक नहीं थी।
मिश्र वाक्य ==> जो घड़ी उसके पास थी , वह ठीक नहीं थी।
रचना के आधार पर मिश्र वाक्य का परिवर्तन
मिश्र वाक्य से सरल वाक्य ==>
१-मिश्र वाक्य ==> जब भी मैं विकास के घर गया,मेरा आदर सत्कार हुआ।
सरल वाक्य ==> विकास के घर जाने पर मेरा आदर सत्कार हुआ।
२-मिश्र वाक्य ==> विशाल ने जो मोबाइल खरीदा है, वह नया है।
सरल वाक्य ==> विशाल ने एक नया मोबाइल खरीदा है ।
३-मिश्र वाक्य ==> शिक्षक ने कहा कि सबको अपना गृहकार्य स्वयं करना है।
सरल वाक्य ==> शिक्षक ने सबको अपना गृहकार्य स्वयं करने को कहा है।
४-मिश्र वाक्य ==> जैसे ही हम बस से उतरे , रिक्शा वाले दौड़ पड़े।
सरल वाक्य ==> हमारे बस से उतरते ही रिक्शा वाले दौड़ पड़े।
५-मिश्र वाक्य ==> ज्योंही गुरुजी आए , भक्त शान्त हो गए।
सरल वाक्य ==> गुरुजी के आते ही भक्त शान्त हो गए।
६-मिश्र वाक्य ==> जब दुर्घटना की खबर सुना , तब मन दुखी हो गया।
सरल वाक्य ==> दुर्घटना की खबर सुनकर मन दुखी हो गया।
७-मिश्र वाक्य ==> ज्यों ही भीखमंगा दिखा , मधुसूदन को दया आ गई।
सरल वाक्य ==> भीखमंगे को देखकर मधुसूदन को दया आ गई
८-मिश्र वाक्य ==> जो लोग परिश्रमी थे , वे सफ़ल हो गए ।
सरल वाक्य ==> परिश्रमी लोग सफ़ल हो गए ।
९-मिश्र वाक्य ==> जैसे ही छुट्टी हुई , बच्चे घर चले गए।
सरल वाक्य ==> छुट्टी होते ही बच्चे घर चले गए।
१०-मिश्र वाक्य ==> यद्यपि रूबी घर गई तथापि काम में नहीं लगी।
सरल वाक्य ==> रूबी घर जाकर भी काम में नहीं लगी।
मिश्र वाक्य से संयुक्त वाक्य ==>
१-मिश्र वाक्य ==> जब भी मैं विकास के घर गया,मेरा आदर सत्कार हुआ।
संयुक्त वाक्य ==> विकास के घर मेरा आदर भी हुआ और सत्कार भी।
२-मिश्र वाक्य ==> विशाल ने जो मोबाइल खरीदा है, वह नया है।
संयुक्त वाक्य ==> विशाल ने एक मोबाइल खरीदा है और वह नया है।
३-मिश्र वाक्य ==> शिक्षक ने कहा कि सबको अपना गृहकार्य स्वयं करना है।
संयुक्त वाक्य==>शिक्षक ने गृहकार्य करने को कहा हैऔर स्वयं करने को कहा है।
४-मिश्र वाक्य ==> जैसे ही हम बस से उतरे , रिक्शा वाले दौड़ पड़े।
संयुक्त वाक्य ==> हम बस से उतरे और रिक्शा वाले दौड़ पड़े।
५-मिश्र वाक्य ==> ज्योंही गुरुजी आए , भक्त शान्त हो गए।
संयुक्त वाक्य ==> गुरुजी आए और भक्त शान्त हो गए।
६-मिश्र वाक्य ==> जब दुर्घटना की खबर सुना , तब मन दुखी हो गया।
संयुक्त वाक्य ==> दुर्घटना की खबर सुना और मन दुखी हो गया।
७-मिश्र वाक्य ==> ज्यों ही भीखमंगा दिखा , मधुसूदन को दया आ गई।
संयुक्त वाक्य ==> भीखमंगा दिखा और मधुसूदन को दया आ गई।
८-मिश्र वाक्य ==> जो लोग परिश्रमी थे , वे सफ़ल हो गए ।
संयुक्त वाक्य==> परिश्रमी लोग परिश्रम किए और सफ़ल हो गए।
९-मिश्र वाक्य ==> जैसे ही छुट्टी हुई , बच्चे घर चले गए।
संयुक्त वाक्य ==> छुट्टी हुई और बच्चे घर चले गए।
१०-मिश्र वाक्य ==> यद्यपि रूबी घर गई तथापि काम में नहीं लगी।
संयुक्त वाक्य ==> रूबी घर गई लेकिन काम में नहीं लगी।
॥ इति - शुभम्॥
विमलेश दत्त दूबे ‘स्वप्नदर्शी’
Tuesday, 31 March 2015
Wednesday, 4 March 2015
RACHANA KE ANUSAR VAKYA KE BHED - रचना के अनुसार वाक्य के भेद
१ - सरल वाक्य ।
२ - संयुक्त वाक्य ।
३ - मिश्र वाक्य ।
१ - सरल वाक्य ==> जिस वाक्य में केवल एक ही क्रिया हो, वह सरल या साधारण वाक्य कहलाता है।
जैसे==>
चिड़िया उड़ती है । श्रेयांश पतंग उड़ा रहा है । गाय घास चरती है ।
२ - संयुक्त वाक्य ==> जब दो अथवा दो से अधिक सरल या साधारण वाक्य किसी सामानाधिकरण योजक (और - एवम् - तथा , या - वा -अथवा, लेकिन -किन्तु - परन्तु आदि) से जुड़े होते हैं, तो वह संयुक्त वाक्य कहलाता हैं।
जैसे==>
(अ) - चन्दन खेल कर आया और सो गया ।
(ब) - मैंने उसे बहुत मनाया परन्तु वह नहीं मानी ।
(स) - कम खाया करो अन्यथा मोटे हो जाओगे ।
३ - मिश्र वाक्य ==> जब दो अथवा दो से अधिक सरल या संयुक्त वाक्य किसी व्यधिकरण योजक (यदि...तो , जैसा...वैसा, क्योंकि...इसलिए , यद्यपि....तथापि ,कि आदि ) से जुड़े होते हैं, तो वह मिश्र या मिश्रित वाक्य कहलाता है।
ऐसे वाक्य में एक प्रधान (मुख्य) उपवाक्य और एक या एक से अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं।
जैसे ==>
(अ) - यदि अधिक दौड़ोगे तो थक जाओगे।
(ब) -यद्यपि मैंने उसे बहुत मनाया तथापि वह नहीं माना।
(स) - जैसा काम करोगे वैसा फल मिलेगा।
(द) - क्षितिज ने बताया कि वह पटना जाएगा ।
मिश्र या मिश्रित वाक्य के दो भेद होते हैं ==>
(क) प्रधान उपवाक्य ==> किसी वाक्य में जो उपवाक्य किसी पर आश्रित नहीं होता अर्थात् स्वतंत्र होता है एवम् उसकी क्रिया मुख्य होती है , वह मुख्य या प्रधान उपवाक्य कहलाता है।
जैसे==>
मोदी जी ने कहा कि अच्छे दिन आएँगे।
इस वाक्य में ‘मोदी जी ने कहा’ प्रधान उपवाक्य है।
(ख) आश्रित उपवाक्य ==> किसी वाक्य में जो उपवाक्य दूसरे उपवाक्य पर निर्भर होता है अर्थात् स्वतंत्र नहीं होता है एवम् किसी न किसी व्यधिकरण योजक से जुड़ा होता है , वह आश्रित उपवाक्य कहलाता है।
जैसे==>
मोदी जी ने कहा कि अच्छे दिन आएँगे।
इस वाक्य में ‘अच्छे दिन आएँगे।’ आश्रित उपवाक्य है।
आश्रित उपवाक्य के तीन भेद होते हैं ==>
(अ) - संज्ञा आश्रित उपवाक्य ==> किसी वाक्य में जो आश्रित उपवाक्य किसी दूसरे (प्रधान) उपवाक्य की संज्ञा हो अथवा कर्म का काम करता हो , वह संज्ञा आश्रित उपवाक्य कहलाता है।
यह ‘कि’ योजक से जुड़ा रहता है।
जैसे==>
रामदेव बाबा ने कहा है कि प्रतिदिन योग करना चाहिए।
इस वाक्य में ‘प्रतिदिन योग करना चाहिए।’ संज्ञा आश्रित उपवाक्य है। क्योंकि यह उपवाक्य ‘कि’ योजक से तो जुड़ा ही है , साथ ही प्रधान उपवाक्य ‘रामदेव बाबा ने कहा है’ के ‘क्या कहा है?’ का जवाब भी है , अर्थात् कर्म भी है। अत: यह संज्ञा आश्रित उपवाक्य है।
(ब) - विशेषण आश्रित उपवाक्य ==> किसी वाक्य में जो आश्रित उपवाक्य किसी दूसरे (प्रधान) उपवाक्य के संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता हो ,वह विशेषण आश्रित उपवाक्य कहलाता है।
यह ‘जो ,जिस, जिन’ योजकों से आरम्भ होता है।
जैसे==>
(अ) - जो दुबला - पतला लड़का है उसे कमज़ोर मत समझो ।
(ब) - जिस लड़के का (जिसका) मन पढ़ाई में नहीं लगता, वह मेरा दोस्त नहीं हो सकता।
(स) - जिन लोगों ने (जिन्होंने) मेहनत किया , वे अवश्य सफल होंगे।
इन वाक्यों में ‘जो ,जिस जिन’ से आरम्भ होनेवाले उपवाक्य अर्थात् ‘जो दुबला - पतला लड़का है’ , ‘जिस लड़के का (जिसका) मन पढ़ाई में नहीं लगता’ तथा ‘जिन लोगों ने (जिन्होंने) मेहनत किया’ अंशवाले उपवाक्य विशेषण आश्रित उपवाक्य हैं।
(स) - क्रियाविशेषण आश्रित उपवाक्य ==> किसी वाक्य में जो आश्रित उपवाक्य किसी दूसरे(प्रधान) उपवाक्य के क्रिया की विशेषता बताता हो , वह क्रियाविशेषण आश्रित उपवाक्य कहलाता है।
यह ‘जब , जहाँ, जैसे , जितना’ योजकों से आरम्भ होता है।
जैसे==>
(अ) - जब घटा घिरने लगी , तब मोर नाचने लगा ।
(ब)-जहाँ बस रुकती है,वहाँ बहुत लोग खड़े रहते हैं।
(स)- जैसे ही पाकिस्तान हारा,लोग टीवी तोड़ने लगे ।
(द) - जितना कहा जाय , उतना ही किया करो।
इन वाक्यों में ‘जब , जहाँ, जैसे , जितना’ से आरम्भ होनेवाले उपवाक्य अर्थात् ‘जब घटा घिरने लगी,’ ‘जहाँ बस रुकती है’ , ‘जैसे ही पाकिस्तान हारा’ तथा ‘जितना कहा जाय’ अंशवाले उपवाक्य क्रियाविशेषण आश्रित उपवाक्य हैं।
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॥ इति - शुभम् ॥
विमलेश दत्त दूबे ‘स्वप्नदर्शी’
रचना के आधार पर वाक्य का परिवर्तन ==>==> क्रमश : अगले पोस्ट में ==>==>
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Friday, 27 February 2015
HINDI VYAKARAN - VAKYA (हिन्दी व्याकरण - वाक्य)
शब्दों का ऐसा सार्थक और व्यवस्थित समूह जो किसी भाव या विचार को पूर्णत: प्रकट करता हो, वाक्य कहलाता है।
जैसे ==> गौरव पत्र लिखता है।
शब्दों का यह समूह अपेक्षित अर्थ प्रदान कर रहा है , अत: यह वाक्य है।
कर्ता और क्रिया पक्ष के अनुसार वाक्य के दो अंग हैं ==>
(क) - उद्देश्य ।
(ख) - विधेय ।
(क)- उद्देश्य==> वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा जाता है,उसे उद्देश्य कहते हैं।
जैसे ==>
१- बिजली चम - चम चमक रही है। ==>
<== २- बच्चे शतरंज़ खेल रहे हैं।
ऊपर के वाक्यों में ‘बिजली’ और ‘बच्चे’ उद्देश्य हैं; क्योंकि इनके विषय में कुछ कहा गया है।
(ख) - विधेय ==> उद्देश्य के बारे में जो कुछ भी कहा जाता है, वह सब कुछ विधेय कहलाता है।
जैसे ==>
१- बिजली चम - चम चमक रही है। ==>
२- बच्चे शतरंज़ खेल रहे हैं। ==>
ऊपर के वाक्यों में ‘बिजली’ और ‘बच्चे’ के बारे में क्रमशः ‘चम - चम चमक रही है।’ और
‘शतरंज़ खेल रहे हैं।’ कहा गया है,
अत: ‘चम - चम चमक रही है।’ और ‘शतरंज़ खेल रहे हैं।’ विधेय हैं।
वाक्य को दो आधारों पर बाँटा गया है ==>
(क) अर्थ के आधार पर
(ख) रचना के आधार पर
जैसे ==> गौरव पत्र लिखता है।
शब्दों का यह समूह अपेक्षित अर्थ प्रदान कर रहा है , अत: यह वाक्य है।
कर्ता और क्रिया पक्ष के अनुसार वाक्य के दो अंग हैं ==>
(क) - उद्देश्य ।
(ख) - विधेय ।
(क)- उद्देश्य==> वाक्य में जिसके बारे में कुछ कहा जाता है,उसे उद्देश्य कहते हैं।
जैसे ==>
१- बिजली चम - चम चमक रही है। ==>
<== २- बच्चे शतरंज़ खेल रहे हैं।
ऊपर के वाक्यों में ‘बिजली’ और ‘बच्चे’ उद्देश्य हैं; क्योंकि इनके विषय में कुछ कहा गया है।
(ख) - विधेय ==> उद्देश्य के बारे में जो कुछ भी कहा जाता है, वह सब कुछ विधेय कहलाता है।
जैसे ==>
१- बिजली चम - चम चमक रही है। ==>
२- बच्चे शतरंज़ खेल रहे हैं। ==>
ऊपर के वाक्यों में ‘बिजली’ और ‘बच्चे’ के बारे में क्रमशः ‘चम - चम चमक रही है।’ और
‘शतरंज़ खेल रहे हैं।’ कहा गया है,
अत: ‘चम - चम चमक रही है।’ और ‘शतरंज़ खेल रहे हैं।’ विधेय हैं।
वाक्य को दो आधारों पर बाँटा गया है ==>
(क) अर्थ के आधार पर
(ख) रचना के आधार पर
क्रमश : अगले पोस्ट में ==>
Wednesday, 25 February 2015
CBSE CLASS 10TH HINDI - KRITIKA - MAIN KYON LIKHATA HUN BY AGYEYA - (मैं क्यों लिखता हूँ)
मैं क्यों लिखता हूँ?
प्रश्न १ - लेखक के अनुसार प्रत्यक्ष-अनुभव की अपेक्षा अनुभूति उनके लेखन में कहीं अधिक मदद करती है , क्यों ?उत्तर - किसी घटना को देखकर कुछ जानना प्रत्यक्ष अनुभव है। लेखन में प्रत्यक्ष-अनुभव नहीं बल्कि अनुभूति मदद करती है। अनुभूति किसी घटना को बाहर से देखने पर नहीं अपितु स्वयं को उस घटना का भोक्ता बनाने से उत्पन्न होती है। इसके लिए आवश्यक है उस घटना को अपने अन्त:करण में समा लेना। जब अन्त:करण में घटना का दृश्य साकार होगा , तब अनुभूति जगेगी, और जब अनुभूति जगेगी तब उस घटना को अभिव्यक्त करने की व्याकुलता भी बढ़ेगी। जब तक यह व्याकुलता अन्दर न हो , तब तक कुछ भी लिख पाना संभव नहीं ।
प्रश्न २ - लेखक ने अपने आपको हिरोशिमा के बिस्फोट का भोक्ता कब और किस तरह महसूस किया ?
उत्तर - लेखक हिरोशिमा की घटना कई बार किताबों और अख़बारों में पढ़ चुका था । बाद में वह हिरोशिमा भी गया और वह अस्पताल भी देखा , जहाँ रेडियम - पदार्थ के शिकार लोग वर्षों से कष्ट झेल रहे थे। इस प्रकार लेखक को अनुभव या प्रत्यक्ष अनुभव तो हुआ , पर अनुभूति नहीं हुई । हिरोशिमा की सड़क पर घूमते हुए उसकी नज़र अचानक एक ऐसे पत्थर पर टिक गई जिस पर एक मानव आकृति छपी हुई थी । दिमाग़ में अचानक एक बात कौंध गई। परमाणु बिस्फोट के समय वह व्यक्ति उस पत्थर के पास खड़ा होगा । बिस्फोट के भभको में आदमी की छाया इस पत्थर पर तो पड़ी होगी और वह स्वयं भाप बनकर उड़ गया होगा । अचानक लेखक के अन्त:करण में परमाणु-बिस्फोट का दृश्य साकार हो गया । वह स्वयं को बिस्फोट का भोक्ता मानने लगा। इस प्रकार प्रत्यक्ष अनुभूति ने उसे बिस्फोट का भोक्ता बना दिया ।
प्रश्न ३ - ‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ पाठ के आधार पर बताइए :--
(क) - लेखक को कौन - सी बातें लिखने के लिए प्रेरित करती हैं ?
उत्तर - लेखक यह जानने के लिए लिखता है कि आखिर वह लिखता क्यों है? लेखक लिखकर अपनी भीतरी विवशता को पहचानने की कोशिश करता है। वह लिखने के बाद ही उससे मुक्त हो पाता है । अर्थात् अपनी आंतरिक या भीतरी विवशता को पहचानने और उससे मुक्ति पाने के लिए ही लेखक लिखता है ।
कभी - कभी बाहरी दबावों जैसे संपादक , प्रकाशक आदि के कहने या आर्थिक लाभ के लिए भी उसे लिखना पड़ता है ,परन्तु ; ये सभी उसके लिखने के मूल स्रोत नहीं हैं ।
(ख) - किसी रचनाकार के प्रेरणा-स्रोत किसी दूसरे को कुछ भी रचने के लिए किस तरह उत्साहित कर सकते हैं ।
उत्तर - प्राय: हम देखते हैं कि लोग एक - दूसरे की देखा - देखी या अनुकरण करते हैं। यदि किसी रचनाकार की भीतरी विवशता को कोई दूसरा भी अपनी विवशता बना ले अर्थात् उसको भी अनुभूति हो जाए, तो वह भी कुछ रचने के लिए व्याकुल या उत्साहित हो सकता है । इस प्रकार कहा जा सकता है कि किसी रचनाकार के प्रेरणा-स्रोत किसी दूसरे को कुछ भी रचने के लिए उत्साहित कर सकते हैं ।
प्रश्न ४ - कुछ रचनाकारों के लिए आत्मानुभूति / स्वयम् के अनुभव के साथ - साथ बाह्य - दबाव भी महत्वपूर्ण होता है । ये बाह्य - दबाव कौन - कौन से हो सकते हैं ?
उत्तर - इस प्रकार के बाह्य-दबाव निम्नलिखित हो सकते हैं :--
(अ)- प्रकाशकों के आग्रह का दबाव |
(ब)- संपादकों के आग्रह का दबाव |
(स)- इष्ट-मित्रों के आग्रह का दबाव |
(द)- यश प्राप्त करने का दबाव |
(इ)- अपनी पहचान बनाए रखने का दबाव |
(फ)- धन प्रप्त करने का दबाव |
प्रश्न ५ - क्या बाह्य-दबाव केवल लेखन से जुड़े रचनाकारों को प्रभावित करते हैं या अन्य क्षेत्र से जुड़े कलाकारों को भी प्रभावित करते हैं, कैसे ?
उत्तर - किसी व्यक्ति को किसी भी क्षेत्र में यदि एक बार प्रसिद्धि मिल जाती है, तो उसके ढेरों चाहनेवाले या प्रशंसक हो जाते हैं । चाहे वह कोई अभिनेता , गायक , संगीतकार या नर्तक हो अथवा नेता , नाट्यकर्मी , मूर्तिकार या कोई खिलाड़ी हो, उसे अपने प्रशंसकों , आयोजकों , आलोचकों , दर्शकों , श्रोताओं या खरीददारों की माँग या दबाव के कारण उन्हीं के अनुरूप प्रदर्शन या कार्य करना पड़ता है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि बाह्य-दबाव केवल लेखन से जुड़े रचनाकारों को ही नहीं ; अपितु अन्य क्षेत्र से जुड़े कलाकारों को भी प्रभावित करते हैं ।
प्रश्न ६ - हिरोशिमा पर लिखी कविता लेखक के अन्त: व बाह्य दोनों दबाव का परिणाम है। यह आप कैसे कह सकते हैं ?
उत्तर - लेखक विज्ञान का विद्यार्थी था । अत: हिरोशिमा जाने से पहले ही किताबों और समाचार-पत्रों के माध्यम से वहाँ के सर्वनाश की पीड़ा को अनुभव किया था । परन्तु ; हिरोशिमा जाकर उसे प्रत्यक्ष-अनुभूति भी हुई । इस प्रकार वह हिरोशिमा पर कविता भी लिखने में समर्थ हुआ। अत: हम कह सकते हैं कि हिरोशिमा पर लिखी कविता लेखक के अन्त: व बाह्य दोनों दबाव का परिणाम है ।
प्रश्न ७ - हिरोशिमा की घटना विज्ञान का भयानकतम दुरूपयोग है । आपकी दृष्टि में विज्ञान का दुरुपयोग कहाँ - कहाँ और किस तरह से हो रहा है ?
उत्तर - हिरोशिमा की घटना निश्चित रूप से विज्ञान का भयानकतम दुरूपयोग है । मेरी दृष्टि में आज लगभग हर क्षेत्र में विज्ञान का धड़ल्ले से दुरुपयोग हो रहा है । आज भयानकतम मारणास्त्रों की बाढ़ आना , साइबर - क्राइम का बढ़ना , प्रदूषण का जानलेवा स्तर तक पहुँचना , जगह - जगह आतंकवादी विस्फ़ोट , भ्रूण - परीक्षण एवम् गर्भपात तथा फ़सल-वृद्धि के लिए ज़हरीले रसायनों के ज़्यादा से ज़्यादा प्रयोग के अलावा और न जाने कितने ही क्षेत्र हैं जहाँ विज्ञान का दुरूपयोग बेरोक-टोक हो रहा है । हर क्षेत्र में मशीनों की बहुतायत ने आदमी को पंगु, निकम्मा और अपना ग़ुलाम बनाना शुरु कर दिया है । आज मानव ही नहीं पूरी दुनिया के अस्तित्व पर ख़तरा मंडरा रहा है । अत: आवश्यक है कि विज्ञान के दुरुपयोग पर अंकुश लगाया जाए ।
प्रश्न ८ - एक संवेदनशील युवा नागरिक की हैसियत से विज्ञान के दुरुपयोग रोकने में आपकी क्या भूमिका है?
उत्तर - विज्ञान के दुरुपयोग ने मानव ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के अस्तित्व को ख़तरे में डाल दिया है । एक संवेदनशील युवा नागरिक की हैसियत से मैं प्रयास करूँगा कि मुझसे या मेरे लिए विज्ञान का दुरुपयोग न हो । मैं उन समस्त क्रिया - कलापों से स्वयम् को दूर ही रखूँगा , जिनमें विज्ञान का दुरुपयोग किया जाता है । इसके अलावा जिन लोगों तक मेरी पहुँच है, उन्हें भी ऐसा ही करने के लिए प्रेरित करूँगा । मैं विज्ञान के दुरुपयोग को रोकनेवाली संस्थाओं का समर्थन करूँगा । प्रकृति की सुरक्षा तथा संरक्षा में संलग्न संस्थाओं का सदस्य बनकर मानव एवम् प्रकृति में संतुलन कायम करने का निरन्तर प्रयास करूँगा ।
॥ इति - शुभम् ॥
विमलेश दत्त दूबे ‘स्वप्नदर्शी’
CBSE CLASS - X - HINDI - KRITIKA - EHI THAIYAN JHULANI HERANI HO RAMA - BY SHIVA PRASAD MISHRA (एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा)
एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा
उत्तर - आज़ादी की लड़ाई से न तो देश का कोई कोना अछूता रहा और न कोई तबका । प्रस्तुत पाठ की दुलारी जो नाच-गाकर किसी तरह अपना गुज़ारा कर रही थी , वह समाज के उपेक्षित वर्ग से थी । जब विदेशी वस्त्रों की होली जलाई जाने लगी , तब दुलारी ने मेनचेस्टर और लंकाशायर में बनी कोरी धोतियों का बंडल देश के दीवानों के सुपुर्द कर दिया । कजरी गायक टुन्नू भी उसी तबके का था, जो देश के दीवानों की टोली में शामिल होकर शहीद हो गया। इस आधार पर कहा जा सकता है कि हमारी आज़ादी की लड़ाई में समाज के उपेक्षित माने जाने वाले वर्ग का योगदान भी कम नहीं है।
प्रश्न २ - कठोर हृदयी समझे जाने वाली दुलारी टुन्नू की मृत्यु पर विचलित क्यों हो उठी ?
उत्तर - टुन्नू और दुलारी का जब से सामना हुआ , तभी से दोनों एक - दूसरे पर आसक्त थे । टुन्नू का प्रेम प्रत्यक्ष था, जबकि कठोर हृदयी दुलारी मन ही मन प्रेम करती थी। अधिक उम्र की होने के कारण वह टुन्नू की ज़िन्दगी में नहीं आना चाहती थी । जब उसे टुन्नू की मृत्यु का समाचार मिला , तब उसका हृदय हाहाकार उठा। उस कठोर हृदयी की आँखों से गंगा - यमुना बहने लगी ।
प्रश्न ३ - कजली - दंगल जैसी गतिविधियों का आयोजन क्यों हुआ करता होगा ? कुछ और परंपरागत लोक - आयोजनों का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर - हमारा देश विविधताओं से भरा है ।यहाँ हर प्रदेश की अपनी-अपनी विशेषता और पर्व - त्योहार हैं । भारतीय संस्कृति लोक - संस्कृतियों का संगम है। इन्हीं लोक - संस्कृतियों में से एक है -- कजरी दंगल। यह सावन - भादों के महीने में आयोजित की जाती है । इसमें दो गायकों के बीच प्रतियोगिता होती है। धान की रोपाई के बाद किसानों को उसके तैयार होने का इन्तज़ार होता है। इस अवकाश के समय वे ऐसे आयोजन से मनोरंजन करते हैं। आल्हा , बैसाखी , बिहू , ओणम और चैती आदि इसी प्रकार के लोक - आयोजन हैं, जो बहुत प्रचलित हैं।
प्रश्न ४ - ‘दुलारी विशिष्ट कहे जाने वाले सामाजिक - सांस्कृतिक दायरे से बाहर है। फिर भी अति विशिष्ट है। इस कथन को ध्यान में रखते हुए दुलारी की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए ।
उत्तर - दुलारी एक सरस कजरी गायिका है , जो अपनी गायन - कला के लिए प्रसिद्ध है । गायिका होने के साथ वह एक अच्छी नृत्यांगना भी है। दुलारी बात - बात में पद्य बोला करती थी, इससे पता चलता है कि वह कवि - हृदय भी थी। महिला होने पर भी वह अपने प्रतिद्वंद्वियों से दबती नहीं थी। होली जलाने के लिए विदेशी धोतियों का बंडल फेंकना यह साबित करता है कि वह नीडर , साहसी , त्यागी , देशभक्त और अंग्रेजी शासन के विरूद्ध थी। परन्तु ; नाचने-गाने वाली होने के कारण उसे अच्छी नज़रों से नहीं देखा जाता। यद्यपि वह विशिष्ट कहे जाने वाले समाज के दायरे से बाहर है तथापि अपने बोल - व्यवहार , शील - आचरण , सच्चे प्रेम तथा देशभक्ति आदि कई चारित्रिक विशेषताओं के कारण वह विशिष्टों से भी विशिष्ट अर्थात् अति विशिष्ट है ।
प्रश्न ५ - दुलारी का टुन्नू से पहली बार परिचय कहाँ और किस रूप में हुआ ?
उत्तर - खोजवाँ और बजरडीहा नामक दो गाँवों के बीच तीज के अवसर पर कजरी - दंगल का आयोजन हुआ था । दंगल में खोजवाँ वालों की तरफ़ से दुलारी बुलाई गई थी , जबकि बजरडीहा वालों ने एक नवोदित कलाकार टुन्नू को उतारा था। इसी कजरी - दंगल में दुलारी का टुन्नू से पहली बार परिचय हुआ था ।
प्रश्न ६ - दुलारी का टुन्नू को यह कहना कहाँ तक उचित था - “तैं सरबउला बोल ज़िन्नगी में कब देखले लोट?” ! दुलारी के इस आक्षेप में आज के युवा - वर्ग के लिए क्या संदेश छिपा है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर - दुलारी ने टुन्नू के जवाब में गाया था-“तैं सरबउला बोल ज़िन्नगी में कब देखले लोट?”! जिसका भाव है- ओ सिरफ़िरे ! तूने अपनी ज़िन्दगी में कब नोट देखा है , बता । दुलारी के इस आक्षेप में आज के युवा - वर्ग के लिए यह संदेश छिपा है कि उन्हें दिखावा या झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। अपनी सीमा में रहते हुए सामर्थ्य के अनुसार ही सपने संजोना चाहिए। नक़ली प्रेम , फिज़ूलखर्ची चारित्रिक - पतन या भटकाव से बचना चाहिए। कल्पना-लोक में विचरण न करके उन्हें वास्तविकता के धरातल पर रहते हुए अपनी परिस्थितियों के अनुसार ही क़दम उठाने चाहिए ।
प्रश्न ७ - भारत के स्वाधीनता आंदोलन में दुलारी और टुन्नू ने किस प्रकार योगदान दिया ?
उत्तर - भारत के स्वाधीनता संग्राम में दुलारी और टुन्नू ने अपनी - अपनी तरह से योगदान दिया। दुलारी ने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार के क्रम में नई धोतियों का बंडल फ़ेंका, इससे उसने अन्य लोगों को ऐसा ही करने के लिए प्रेरित भी किया। टुन्नू खादी धारण कर देश के दीवानों की टोली में शामिल हो गया। उसने अंग्रेजों का विरोध किया और इस विरोध में वह शहीद भी हो गया ।
प्रश्न ८ - दुलारी और टुन्नू के प्रेम के पीछे उनका कलाकार मन और उनकी कला थी ? यह प्रेम दुलारी को देश - प्रेम तक कैसे पहुँचाता है ?
उत्तर - दुलारी और टुन्नू दोनों कजरी - गायक थे। टुन्नू युवा था , जबकि दुलारी प्रौढ़ा थी। दोनों एक - दूसरे की गायकी से प्रभावित थे और दोनों एक - दूसरे की कला का सम्मान भी करते थे। यह सम्मान - भाव ही कालान्तर में प्रेम में परिणित हो गया । अपने प्रेम का एहसास होते ही दुलारी ने टुन्नू को अपने यहाँ आने से मना कर दिया । दुलारी से निराश टुन्नू स्वयम् को देश के लिए समर्पित करने के निर्णय के साथ स्वतंत्रता - आंदोलन में शामिल हो गया । अपने टुन्नू को आंदोलनकारियों में देख दुलारी ने भी वही रास्ता अपनाया और विदेश में बनी नई धोतियों के अपने बंडल को होली जलाने के लिए फ़ेंक दिया । इस प्रकार हम देखते हैं कि कला से उपजा प्रेम दुलारी को देश-प्रेम तक पहुँचा देता है ।
प्रश्न ९ - जलाए जाने वाले विदेशी वस्त्रों के ढेर में अधिकांश फ़टे - पुराने थे,परन्तु दुलारी द्वारा विदेशी मीलों में बनी कोरी साड़ियों का फ़ेंका जाना उसकी किस मानसिकता को दर्शाता है?
उत्तर - देश के दीवानों द्वारा फैलाई चादर पर जो विदेशी वस्त्र फेंके जा रहे थे , वे अधिकांश फ़टे - पुराने थे। किन्तु ; दुलारी ने नई धोतियों का बंडल फ़ेंका था । इससे पता चलता है कि अंग्रेजों के प्रति उसके मन में बड़ा आक्रोश था। साथ ही यह भी कि उसने हृदय से विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया। इससे उसकी देश भक्त , त्याग और दृढ़ - इच्छा शक्ति का भी पता चलता है ।
प्रश्न १० - “ मन पर किसी का वश नहीं ; वह रूप या उमर का कायल नहीं होता।” टुन्नू के इस कथन में उसका दुलारी के प्रति किशोरजनित प्रेम व्यक्त हुआ है परन्तु उसके विवेक ने उसके प्रेम को किस दिशा में मोड़ा ?
उत्तर - दुलारी उम्र में टुन्नू से बहुत बड़ी थी। फिर भी टुन्नू का मन उसके प्रति आसक्त था । उसका यह प्रेम शारीरिक या रौपिक नहीं बल्कि आत्मिक था। तभी तो दुलारी ने जब उसके प्रेम के उपहार को उपेक्षा से फ़ेंक दिया तो उसकी आँखों से आँसू और मुँह से “ मन पर किसी का वश नहीं ; वह रूप या उमर का कायल नहीं होता।” किशोरजनित प्रेम संवाद निकल पड़ा। उसका प्रेम नि:स्वार्थ था। अत: उसके विवेक ने उसके प्रेम को देश - प्रेम की ओर मोड़ दिया। ऐसा शायद इसलिए हुआ क्योंकि देश-प्रेम नि:स्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा है ।
प्रश्न ११ - “एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा ! का प्रतीकार्थ समझाइए ।
उत्तर - ‘नाक’ सदा से मान, प्रतिष्ठा और इज्ज़त का प्रतीक रही है। शायद इसी कारण सबको प्रिय रही है ।‘झुलनी’ , नथिया अथवा लौंग उसी नाक की शोभा बढ़ाने वाले गहने हैं। अत: ये गहने भी अति प्रिय हैं। भारतीय समाज में ये सुहाग की निशानी माने जाते हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है कि दुलारी के ‘नाक का गहना टुन्नू था ।
पुलिस ने दुलारी को ज़बरदस्ती उसी स्थान पर नाचने - गाने के लिए बुलाया, जहाँ टुन्नू की हत्या की गई थी । तब दुलारी ने “एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा ! कासो मैं पूछूँ?” जैसा लोक-संगीत गाया। जिसका अर्थ है -यही वह स्थान है, जहाँ मेरी ‘झुलनी’ (टुन्नू के अर्थ में) खो गई है, मैं किससे पूछूँ, कहाँ ढूँढ़ूँ ? इस गीत में उसके मन की पीड़ा , आक्रोश एवम् व्यथा - कथा प्रकट हुई है ।
॥ इति - शुभम् ॥
विमलेश दत्त दूबे ‘स्वप्नदर्शी’
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