Thursday, 12 February 2015

CBSE CLASS X HINDI - NOUBAT KHANE ME IBADAT (नौबतखाने में इबादत)

 
 नौबतखाने में इबादत
प्रश्न १- शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?
उत्तर- शहनाई की दुनिया में डुमराँव को दो कारणों से याद किया जाता है। पहला तो इसलिए कि सर्वश्रेष्ठ शहनाई वादक भारत-रत्न विस्मिल्ला खाँ का जन्म डुमराँव(बिहार) में हुआ था। दूसरा, डुमराँव में मुख्यत: सोन नदी के किनारे नरकट नामक घास पाई जाती है,जिससे शहनाई की रीड बनाई जाती है।

प्रश्न २- बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक क्यों कहा गया है?
उत्तर- शहनाई मांगलिक अवसरों पर बजाया जानेवाला वाद्य है। इसे मंगल वाद्य भी कहते हैं और इसकी ध्वनि ‘मंगल ध्वनि’ कही जाती है। विस्मिल्ला खाँ सर्वश्रेष्ठ शहनाई वादक रहे। उनके उत्कृष्ट वादन के लिए उन्हें ‘भारत रत्न’ से विभूषित किया गया। आज भी उनसे बेहतर वादक नहीं हुआ। इसलिए उन्हें शहनाई की मंगल ध्वनि का नायक कहा जाता है।

प्रश्न ३- सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय है? शहनाई को ‘सुषिर वाद्यों में शाह’ की उपाधि क्यों दी गई होगी?
उत्तर- अरब देश में फूँककर बजाए जानेवाले वाद्य अर्थात् (सुषिर वाद्य) को ‘नय’ कहते हैं। ऐसे सुषिर वाद्यों में शहनाई अपनी मधुर एवं सुरीली आवाज के कारण श्रेष्ठ मानी जाती है।इसी कारण इस शहनाई को शाह-ए-नय अर्थात् सुषिर वाद्यों में शाह (सम्राट) कहा गया होगा।

प्रश्न ४- आशय स्पष्ट कीजिए-
(क) ‘फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।’
उत्तर- प्रस्तुत पंक्तियों का आशय है कि बिस्मिल्ला खाँ ईश्वर से सदा यही प्रार्थना करते थे कि उनकी लुंगी भले ही फट जाए,किन्तु उनकी शहनाई का सुर कभी न फटे। वे जानते थे कि फटी लुंगी तो सिल जाएगी,लेकिन सुर ही फट गया तो उसे नहीं सुधारा जा सकता।

(ख) ‘मेरे मालिक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आसूँ निकल आएँ।’
उत्तर- प्रस्तुत पंक्तियों का आशय है कि बिस्मिल्ला अपने पाँचों वक्त की नमाज में खुदा से सच्चे सुर की माँग करते थे। वे दुआ करते कि ऐ खुदा! मेरे सुर में वह तासीर (प्रभाव) पैदा कर कि जो भी सुने वह भाव-विभोर हो जाए। उसकी आँखों में हर्ष की अधिकता के कारण सच्चे आसूँ छलछ्ला उठें।

प्रश्न ५ -काशी में हो रहे कौन से परिवर्तन बिस्मिल्लाह खाँ को व्यथित करते हैं ?
उत्तर - काशी साहित्य ,संगीत , कला और परंपराओं से ओत - प्रोत गंगा -जमुनी संस्कृति वाली प्रसिद्ध नगरी है।किन्तु आज उसकी समस्त विशेषताएँ लुप्त होती जा रही हैं।काशी के पक्का महाल से मलाई बरफ़ बेचने वाले जा चुके हैं।अब देशी घी की कचौड़ी और जलेबी नहीं बिकती,न ही संगीत,साहित्य,अदब और संगतकारों के प्रति आदर का भाव रहा। घंटों रियाज़ और धार्मिक एकता को आज कोई नहीं पूछता।ये सभी परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते हैं।

प्रश्न ६ - पाठ में आए किन प्रसंगों के आधार पर आप कह सकते हैं कि --
(क) - बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे ?
उत्तर- बिस्मिल्ला खाँ शिया मुसलमान थे। अपने धर्म,उत्सव और त्योहारों में गहरी आस्था रखने वाले खाँ साहब एक सच्चे मुसलमान की तरह पाँचों वक्त की नमाज़ अदा करते थे। ईद - मुहर्रम मनाते थे। दूसरी तरफ गंगा नदी और बाबा विश्वनाथ तथा बालाजी पर अपार श्रद्धा रखते थे।होली - दीवाली मनाते थे। काशी के संकटमोचन मंदिर के संगीत आयोजन में वे अवश्य रहते थे। इस आधार पर कहा जा सकता है कि बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।

(ख) वे वास्त्विक अर्थों में एक सच्चे इंसान थे।
उत्तर- बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे। वे बड़े धार्मिक और सादे व्यक्तित्व वाले इंसान थे।उन्होंने खुदा से कभी धन-समृद्धि नहीं माँगी और न ही अपने शहनाई वादन को बाज़ार में भुनाया।उसे वे खुदा की नेमत मानते रहे। तंगहाल रहते हुए भी वे हिन्दुओं और मुसलमानों की एकता और भाईचारें के लिए प्रयासरत रहे। भारत-रत्न पाकर भी वे पूर्व  की भाँति रहे,उनमें कोई परिवर्तन नहीं आया। इस आधार पर हम कह सकते हैं कि वे वास्तविक अर्थों में वे एक सच्चे इंसान थे।

प्रश्न ७- बिस्मिल्ला खाँ के जीवन में जुड़ी उन घटनाओं का उल्लेख कीजिए जिन्होंने उनकी संगीत साधना को समृद्ध किया?
उत्तर- बिस्मिल्ला खाँ का जन्म एक संगीतज्ञ परिवार में हुआ था। बचपन से ही संगीतमय वातावरण में पले बढ़े। जिन व्यक्तियों ने बिस्मिल्ला खाँ की संगीत साधना को समृद्ध किया,उनमें उनके नाना जी , मामा अलीबख्श खाँ,रसूलन बाई और बतूलन बाई,कुलसुम हलवाइन आदि मुख्य हैं।इन्हीं के कारण उन्हें संगीत की प्रेरणा मिली। अभिनेत्री सुलोचना के फिल्मी गाने,रसूलन और बतूलन बाई की गायकी,नाना जी का शहनाई वादन,मामा का रियाज़ और कुलसुम की कचौड़ी की कड़ाही में खौलते तेल की कल-कल में संगीत का आरोह-अवरोह सुनने जैसी समस्त बातों ने उनकी संगीत साधना को समृद्ध किया।

प्रश्न ८- बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया?
उत्तर- बिस्मिल्ला खाँ का व्यक्तित्व सादगी से पूर्ण था। उनकी संगीत के प्रति गहरी आस्था,धार्मिक-सौहार्द्र की भावना,गंगा-जमुनी तहजीब,विनोदी स्वभाव,भारतीय संस्कृति के प्रति निष्ठा एवं ईश्वर-अल्लाह में गहरी श्रद्धा एवं आस्था ने हमें बहुत प्रभावित किया।

प्रश्न ९- मुहर्रम से बिस्मिल्ला खाँ के जुड़ाव को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर- एक सच्चा मुसलमान होने के नाते बिस्मिल्ला खाँ का ‘मुहर्रम’ से गहरा लगाव था। वे दस दिनों तक हजरत इमाम हुसैन के प्रति शोक मनाते थे।इन दिनों वे न तो शहनाई बजाते और न किसी समारोह में शामिल होते। आठवें दिन नौहा(शोक-धुन) बजाते हुए वे दालमंडी से फातमान तक पैदल चलकर जाते और शोक सभा में शामिल होते । मुहर्रम के इस गमज़दा महौल से उनका विशेष लगाव था।

प्रश्न १०- बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे,तर्क सहित उत्तर दीजिए।
उत्तर- बिस्मिल्ला खाँ ने लगभग ८० वर्षों तक लगातार शहनाई बजाया। वे भारत ही नहीं विश्व के सर्वश्रेष्ठ शहनाई वादक रहे।उन्होंने अपने वादन-कला को अंत तक पूर्ण नहीं माना।वे अंत तक घंटों रियाज़ करते रहे।अपने पाँचों वक्त की नमाज में वे खुदा से सच्चे सुर पाने की प्रार्थना करते रहे।वे अपने पर झल्लाते थे कि उन्हें अब तक सही ढंग से शहनाई बजाने की तमीज़ क्यों नहीं आई।८० वर्ष तक शहनाई बजाकर भी स्वयं को अपूर्ण मानना और पूरी लगन के साथ पूर्णता के लिए सतत् प्रयास करना यह सिद्ध करता है कि वे कला के अनन्य उपासक थे।

प्रश्न ११- - निम्नलिखित मिश्र वाक्यों के उपवाक्य छाँटकर भेद भी लिखिए-
क) यह जरूर है कि शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं।
उत्तर- प्रधान - यह जरूर है
     संज्ञा उपवाक्य - कि शहनाई और डुमराँव एक दूसरे के लिए उपयोगी हैं।


ख) रीड अंदर से पोली होती है जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है।
उत्तर- प्रधान - रीड अंदर से पोली होती है
      विशेषण उपवाक्य - जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है ।

ग) रीड नरकट से बनाई जाती है जो डुमराँव में मुख्यत: सोन नदी के किनारे पर पाई जाती है।
उत्तर- प्रधान - रीड नरकट से बनाई जाती है
      विशेषण उपवाक्य - जो डुमराँव में मुख्यत: सोन नदी के किनारे पर पाई जाती है।


घ) उनको यकीन है,कभी खुदा यूँ हीं उनपर मेहरबान होगा।
उत्तर- प्रधान - उनको यकीन है
      संज्ञा उपवाक्य - कभी खुदा यूँ हीं उनपर मेहरबान होगा।


ड़) हिरन अपनी ही महक से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है जिसकी गमक उसी में समाई है।
उत्तर- प्रधान - हिरन अपनी ही महक से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है
      विशेषण उपवाक्य - जिसकी गमक उसी में समाई है।


च) खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा।
उत्तर- प्रधान - खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है
     संज्ञा उपवाक्य - कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा। 


प्रश्न १२- निम्नलिखित वाक्यों को मिश्रित वाक्यों में लिखिए-
क) इसी बालसुलभ हँसी में कई यादें बंद हैं।
उत्तर- यही वह बालसुलभ हँसी है जिसमें कई यादें बंद हैं।

ख) काशी में संगीत आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है।
उत्तर- काशी में संगीत आयोजन की एक परंपरा है जो प्राचीन और अद्भुत है।

ग) धत् ! पगली ई भारत-रत्न हमकों शहनाईया पे मिला है,लुंगिया पे नहीं।
उत्तर- धत् ! पगली ई भारत-रत्न हमकों लुंगिया पे नहीं बल्कि शहनाईया पे मिला है।

घ) काशी का नायाब हीरा हमेशा से दो कौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता है।
उत्तर- जो हमेशा से दो कौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा वह काशी का नायाब हीरा है। 

 
॥इति शुभम्॥
 विमलेश दत्त दूबे ‘स्वप्नदर्शी’

6 comments:

  1. nic answers,little long but still good...

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  2. Explain the line:Phunk mein azaan ki taasir utarti chali aaye.

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    1. Iska arth hai ki shahnai m phoonk marte wakt us azaan m mangi gayi dua ki tasir(power) aa jaee

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  3. Explain the line:Phunk mein azaan ki taasir utarti chali aaye.

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    1. अपनी वादन-कला को बिस्मिल्ला खाँ अंत तक अपूर्ण ही मानते रहे। उसकी पूर्णता के लिए एक ओर जहाँ वे रियाज़ करते थे, वहीं दूसरी ओर अपने पाँचों वक्त की नमाज़ में खुदा से अपने सुर को तासीरदार बना देने की इल्तिज़ा भी करते। खुदा का क़रम कहिए या फ़कीर की दुआओं का जमाल या फिर नेकनीयत खाँ साहब के रियाज़ के प्रति दीवानग़ी का असर; कि उनके शहनाई वादन में वह प्रभाव उत्पन्न हो गया, जिस प्रभावशाली सुर की प्रार्थना वे अपने पाँचों वक़्त की नमाज़ में किया करते थे। बिस्मिल्ला खाँ के लिए शहनाई वादन तो खुदा की नेमत थी ही, अब उसी के फ़जल से उसमें अज़ाँ जितनी पाकीजग़ी भी भर गई। बल्लाह फिर क्या कहना ! उनके फूँक में अज़ाँ की तासीर उतरती चली गई।
      (तात्पर्य यह कि उनका शहनाई वादन इतना प्रभावकारी हो गया कि सुनने वाले भाव-विभोर हो जाया करते थे। अन्तर्मन तत्क्षण विकारों से दूर हो जाता था। हृदय सद्भावों से आपूरित हो जाया करता था।)

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  4. sir ji bahut vyaapak hai aapka gyaan

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